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कुछ तो गलत है मेरे साथ - हिंदी कविता

कुछ तो गलत है मेरे साथ, दूसरों को ख़ुश देख के खुशी मिलती है| जिन्हे जानता पहचानता भी नहीं, उन्हें हँसता देख के दुनिया हसीन लगती है || सागर की लहरों के शोर में शांति मिलती है, पहाड़ो में सनसनाती हवा में आवाज़ मिलती है| जंगलो की खामोसी में अपनापन लगता है, शहर की भीड़ अजनबी लगती है|| कुछ तो गलत है मेरे साथ, दुनिया भली भली सी लगती है || किसी से टकरा जाऊ तो  खुद माफ़ी मांग लेता हूँ, कोई गिरे तो हँसता नहीं हाथ बढ़ता हूँ| अंजानो का दर्द देख आँखे भीग जाती है, गरीब कोई मुस्कुराए तो मैं भी मुस्कुराता हूँ|| कुछ तो गलत है मेरे साथ इंसानियत में विश्वाश जताता हूँ || लुटेरों से भरे बीहड़ में, मुसाफिरों को सही राह दिखता हूँ|| खुद अकेला भी महसूस करू लेकिन, दोस्तों का साथ निभाता हूँ|| कुछ तो गलत है मेरे साथ, भीड़ से अलग चलना चाहता हूँ|| कोशिश कर कर हार भी जाता, हौसला नहीं गवाता हूँ| कुछ तो गलत है मेरे साथ, हर समय आशा का दीपक जलाता हूँ|| कुछ तो गलत है मेरे साथ, कुछ अलग कुछ नया करना चाहता हूँ ||

The overthinker

"Long time no see", perhaps this is how this blog would greet me today, if it was alive. Yes, It has been a long time, I haven't been writing anything at all, unless it is work related. The habit isn't there, I have changed a lot in past many years. I think i forgot about this blog for a long time. I wonder if it matters at all. who is reading this other than some friends, with whom I share the link of the posts. I think it doesn't matter, as long as I am able to write my feelings and convert my thoughts in visible words. Words which are leaving me slowly, silently. I don't even know if I am an introvert or extrovert anymore. When I look in the past and present to compare, I see a lot has changed, a lot indeed. I feel like I am not what I used to be. But then again isn't it the key rule of life and time, it changes. Sometimes I think, Have I accomplished something ? Am I happy ? Am I satisfied with what I have ? Yes, I have accomplished something, more tha...

घर की याद

दिवाली के दिए जलाने लगे है लोग घरो में, हम बिजली की रौशनी में नूर हुए बैठे है| पैसे की भागमभाग में ऐसे उलझे है, माँ पापा और घर से दूर हुए बैठे है || जाने कब अकेले हो गए भीड़ में चलते चलते, खुद ही में उलझे उलझे से रहते है| जाने किस बात का घमंड हुआ है, किस सल्तनत के हुज़ूर हुए रहते है || कहने को जीते है अमीरो का जीवन, पर अपने मन से फ़कीर हुए बैठे है| मुड़ के लौट जाने का मन बोहोत करता है, पर पैसा कमाने का फितूर लिए बैठे है ||

मुश्किल है!

कभी कभी ख़ामोशी भी अच्छी होती है, क्युकी शब्द खोज लाना भी मुश्किल है| सुकून के पल दे जाते है बे-आवाज लम्हे, शोर में खुद को सुन पाना भी मुश्किल है || दिलकश नज़ारे जो आँखों में उतर आए थे, उन्हें भुला पाना भी मुश्किल है| वो ठंडी हवाओ की सर्द सरसराहट, दिल मचल न जाए, रोक पाना भी मुश्किल है || दोस्तों की संग जो पल बिताए, उन किस्सों को भूलना भी मुश्किल है, लड़खड़ा जाए जुबान शराब पीने की बाद, उसे संभल पाना भी मुश्किल है || बस याद करते रहना उस बीते कल को, और फिर मुस्कुराना भी मुश्किल है| दिल पे पत्थर रख कर, सीधे चलते जाना भी मुश्किल है  ||

कौन हु मैं - Who Am I - हिंदी कविता - HIndi Poem

कौन हु मैं, खुद को खोजता फिरता हु, समाज की भीड़ में एक चेहरा बनने की कोशिस में.. एक छोटे से साये की तरह हु उजाले में दीखता हु, और सिमट जाता हु डरकर अंधेरे के आगोश में.. घिरा हु असंख्य अजनबीओ से, जिनकी खुद कोई पहचान नहीं.. भीड़ के रूप में जाने जाते है ये सब लोग, अकेले आगे निकल आने की हिम्मत नहीं.. अगर कोई दौड़ कर आगे निकल भी जाए, तो समझते है वो इनका अपना नहीं.. जाने क्यों डरते है चार लोगो से, जो सायद अर्थी तक को कन्धा देंगे नहीं.. मुझे क्या मैं चलता रहूँगा अपने धर्म पथ पर, निकल जाऊंगा अकेला भीड़ से छट कर. . अपनी अलग एक पहचान बनाने, फिर इस भीड़ को एक राह दिखाने.. समाज को सायद समझ नहीं आएगा, इंसान जाने कब तक आपस में लड़ लड़ मरजाएगा.. कोई आँखे खोलने को त्यार ही नहीं, गहरी खाई पर पुल है देखने को कोई त्यार ही नहीं.. कब तक अंधे बन के दुनिया से पिछड़ते रहोगे, कब तक जातिवाद में फस कर आपस में लड़ते रहोगे.. जागो और अपनी एक पहचान बनाओ, जातिओ से ऊपर उठ कर हिन्दुस्तानी कहलाओ.. मैं सायद आज कुछ भी नहीं, लेकिन कल जरूर कुछ बन जाऊंगा, करोडो की भीड़ से निकलकर अपनी खुद की पहचान बनाऊंगा..

zindgi ka asaan sa raaj

aj ek panchi ko aasmaa se girte dekha, pankh to nahi lekin hausla toota tha sayad.. girne nahi diya use dharti tak maine, main bhi udne nikla tha aakash me hi tham liya.. pucha usse kyu marne ka irada hai? wo bola toot gyi jindgi se meri aas.. baadaloon ko chu kar udta hu, lekin mit-ti hi nahi meri pyass.. samjhaya use, sehlaya use, thandi hawao me nehlaya use.. batlaya use kush rehne ka raaz, bas upar uth-te raho lekin kam karo awaaz.. kisi se daro nahi, kisi ko darao nahi.. muskurate raho har pal, kisi ka dil dukhao nahi.. kehne laga wo mukjse haste haste, lagta hai naya naya udna seekhe ho.. tumhe pta nahi sayad hawao me kitni garmi hai, sooraj ko sirf pedo ki chhaoon se dekhe ho.. batlaya use mene ki pankh mere naye hai, lekin tapti dhoop ki garam zameen ka ehsaas hai.. kabhi ladhkhadate hue chala karta tha, aaj uncha udne ka pura hua khwab hai.. sun o parinde, neel gagan ke sehzade, zameen me bhi aag, aasmaan me bhi aag hai.. bhag mat mushkilo se, jeena seekh le, sab kuch hai asa...

Happy Holi To Indian Armed Forces

खूब खेली होली तुमने, खूब उड़ाया रंग है | लाल गुलाबी नीला पीला, देख के दुनिया दंग है || भूल न जाना उनको भी तुम, रोज़ जो खेले होली रे | रंग नहीं वो लहू है उनका, लाल जो उनपे रंग है रे || अमन हर्ष के दिन जो तुमने, हर दिन रात है देखे | मौत से लड़ते हर पल सरहद पे, ऐसे बहादुर है अपने बांके || भारत माँ की जय बोलके , प्राणो की आहुति देते है | रंग न उनका कभी भी उतरे, तीन रंग में लिपटे है || है घर और परिवार भी उनका, आस लगाए घर बैठा | सायद एक दिन घर आएगा, मेरा भाई, मेरा बेटा || होली के अवसर पे तुम सब, बांटो खूब मिठाई रे | बस न भूलो उन पागलो को, सरहद पे जो लड़े लड़ाई रे || पहने कपडे हरे रंग के, लाल रंग से सने हुए | सांस न ले फिर भी घर आते, तीन रंग में रमे हुए || एक देश अनेक रंग, अलग भाषा अलग ढंग | एक साथ है कदम ताल, और देश भक्ति के मस्त मलंग || खेला मैं भी होली आज, पर भूला नहीं हु उनका काज| मेरा दोस्त है वो मेरा भाई है, भारत का एक सिपाही है || मेरा हर रंग उसे समर्पित, मेरे खून का कतरा उसे ही अर्पित| मेरे हाथ जुड़े जो प्रार्थना में, दुश्मन से मिले उसे हर पल जीत || मेरे देश के हर सिपाही को, थल सेना, वायु ...