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Showing posts from October, 2015

Bachpan ki yaadein

kitna anmol waqt tha wo bhi, papa jab sham ko ghar aate the.. jeb me unki 1-2 rupye ke sikke khankhanate the.. kabhi kabhi khud pyar se humare haath me thamate the.. kabhi jeb se gir jane pe main or behan uthane ko daud jate the.. subha jaldi na uthne ko bahane banana, school na bhejne ko maa ko manana.. yaad hai mujhe bhot mar khate the..

The Theory of Parallel Universes - Past, Present and Future

Okay, So Yes this is fiction and I don't know if this makes any sense or not but this is based on a discussion I and a friend had in Office. Yes, you can laugh, but we were discussing this in office as we were pretty confused with an episode of " the flash ". Okay, let me give you an overview. The meta human is controlling the oceanic winds and weather to create a huge tsunami and flash is running too fast on the beach to form a wind barrier and suddenly he runs so fast than a time wrap is created and he is time traveled into his past, which he had already gone through. So now we were confused that if the future Flash is in past which was some time ago was his present, then what happened to the Flash of that time, he just ran there on the street and fells how he get there, and then he realize what just happened and capture "the evil weather guy"(No offense to flash loving community by not remembering the name of the evil guy, and right now I am too lazy

Dream of Life - live for your dreams

एक हवा के झोंके में एक दिन । फैला के पंख उड़ गया था मैं ।। वो ठंडी हवा महसूस हुई । बादलो में घुल गया था मैं ।। मेरे पास आ के एक चिड़िया बोली । तुम कैसे उड़ सकते हो ?|| तुम तो एक इंसान हो । इन बादलो में क्या करते हो ?|| ये मेरा आँगन घर है मेरा । मुझे उड़ने की आजादी है ।। ऐ नन्ही चिड़िया सुन तो जरा । ये मन मेरा फरियादी है ।। जरा कान लगा के सुन मेरे संग । ये हवा मुझे कुछ कहती है।। मैं सपनो में हूँ खोया हुआ । मेरी साँसे आज यूं बहकी है ।। मुझे उड़ लेने दे सपनो में । फिर सुबह मुझे जग जाना है ।। कुछ जी लेने दे सपनो में । सुबह रूपया पैसा कामना है ।। तू क्या जाने इंसानो को । इन्हें आजादी नहीं भाति है ।। भय और लालच के साये में । इनकी जिंदगी घबराती है।। मुझे आज ही मेरा ज्ञान हुआ । मैं अभी अभी इंसान हुआ ।। अभी बर्बादी से उभरा हूँ । मुझे सपनो का संज्ञान हुआ ।। तेरे पंख है तू उड़ जाती है । एक पल में फुर्र हो जाती है।। मुझे भी ले चल संग अपने । क्यों दूर से मुझे सताती है ।। चिड़िया ने मुझे जवाब दिया । एक और नया मुझे ख्वाब दिया ।। मुझे बोली खुद पे नाज़ तो कर । रब ने तुझे जीवन दान दिया ।। कुछ क